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त्योहार की भीड़: सब कुछ फुल हो तो ट्रेन और बस के विकल्प

घर जाने वाली ट्रेनें बुकिंग खुलने के दिन ही भर जाती हैं। छूट गया हो तो भी आज़माने लायक चीज़ें हैं।

बुकिंग खुलने का दिन सबसे अहम है

रिज़र्वेशन फिलहाल यात्रा से 60 दिन पहले खुलता है। त्योहार की तारीख के लिए वही दिन मायने रखता है, और लोकप्रिय ट्रेनें कुछ ही मिनटों में वेटिंग में चली जाती हैं। तारीखें पता हों तो जितना जल्दी पूछेंगे, उतने ज़्यादा विकल्प मिलेंगे।

अगर आपकी ट्रेन फुल है

अपनी तारीख के आसपास के दिन देखिए, क्योंकि एक दिन आगे-पीछे बहुत फ़र्क़ डाल सकता है। पास के स्टेशन, किसी बड़े जंक्शन से कनेक्टिंग ट्रेन और बस भी देखिए। रेलवे त्योहार स्पेशल ट्रेनों की घोषणा तारीख के करीब करता है, और एजेंट बता सकता है कि आपके रूट पर कोई चल रही है या नहीं।

जल्दी मैसेज कीजिए

कैंसिलेशन की सबसे ज़्यादा संभावना चार्ट बनने से पहले के दिनों में होती है। रूट जल्दी भेज देंगे तो पूरी रात ऐप रिफ्रेश करने की जगह एजेंट आपके लिए कोशिश करता रहेगा।

व्हाट्सएप पर मैसेज करें

हम टिकट बुक नहीं करते और पैसे नहीं लेते। बुकिंग वेरिफाइड लोकल एजेंट करता है और पेमेंट से पहले कुल रकम बताता है। फुल ट्रेन में सीट की गारंटी कोई नहीं दे सकता।

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